इक्विटी इंडेक्स फ्यूचर्स ट्रेडिंग, पारंपरिक शेयर ट्रेडिंग का एक लोकप्रिय विकल्प बन गई है। इक्विटी फ्यूचर्स में सेक्टर-आधारित या पूरे बाज़ार के इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट शामिल होते हैं, जिनमें संस्थागत निवेशक, खुदरा ट्रेडर्स, व्यक्तिगत ट्रेडर्स और बाज़ार के अन्य प्रतिभागी ट्रेड करते हैं। इस इंस्ट्रूमेंट के कई अहम फ़ायदे हैं, जिनकी मदद से निवेशक लंबी या छोटी अवधि के नज़रिए से ट्रेड कर सकते हैं और संभावित रूप से जोखिम भरे एसेट से भी बच सकते हैं।

इस लेख में, हम इक्विटी मार्केट फ्यूचर्स ट्रेड करने के कुछ मुख्य फ़ायदों पर नज़र डालेंगे।
मान लीजिए, आप बैंकिंग सेक्टर से जुड़े शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। किसी अलग शेयर जारीकर्ता (PSU या निजी बैंक) को ढूँढ़ना कभी-कभी काफ़ी मुश्किल हो सकता है। इक्विटी मार्केट फ़्यूचर्स से पूरे बैंकिंग सेक्टर का एकीकृत नज़रिया मिल सकता है। इससे पोर्टफोलियो में विविधता लाने के कुछ के अवसर भी मिलते हैं।
आप ट्रेडिंग का कोई भी तरीका पसंद करते हों, आप लंबी या छोटी अवधि की ट्रेडिंग रणनीति चुन सकते हैं। इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग, दोनों के लिए उपयुक्त है। कुछ क्षेत्रीय बाज़ारों में बैंकिंग या अन्य प्रकार के शेयरों में शॉर्ट पोज़िशन लेने पर निवेशकों के लिए प्रतिबंध और सीमाएँ होती हैं। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशिष्ट जोखिम हमेशा बने रहते हैं।



इसलिए, Bank Nifty पर इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स बेचना सबसे अच्छा तरीका है। इस रणनीति से सभी बाधाओं और लागू सीमाओं को पार करना संभव हो जाता है। उदाहरण के लिए, यह उन लोगों के लिए अच्छा काम कर सकता है जो भारत में स्टॉक इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग करना पसंद करते हैं। यहाँ Nifty फ़्यूचर्स बेचना एक अच्छा विकल्प है, अगर आप जोखिम भरे शेयरों और सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियों से बचना चाहते हैं।
इंडेक्स की ट्रेडिंग में हमेशा मार्जिन पर ट्रेडिंग होती है। हालाँकि, इक्विटी मार्केट फ़्यूचर्स में मार्जिन कम हो सकता है। उदाहरण के लिए, Bank Nifty और Nifty इंडेक्स की तुलना में अलग-अलग शेयरों पर मार्जिन आम तौर पर ज़्यादा होता है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि इंडेक्स आम तौर पर कोई एक शेयर नहीं, बल्कि शेयरों का समूह होते हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से विविधता मिलती है। कम मार्जिन का मतलब है कम जोखिम। इसके अलावा, इससे निवेशकों के लिए संभावित रूप से लाभदायक पोज़िशन लेने की गुंजाइश बढ़ती है और ब्रोकर के पास कम फ़ंड लॉक होता है।
इक्विटी मार्केट फ़्यूचर्स से जोखिमों से बचाव कर पाना इसका एक प्रमुख फ़ायदा है। इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि आप संस्थागत निवेशक हैं या व्यक्तिगत निवेशक। किसी समय आपके पास एसेट्स का बड़ा पोर्टफोलियो हो सकता है। उदाहरण के लिए, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण बाज़ार में लगभग 10-12% गिरावट आने की आशंका हो सकती है। साथ ही, आपको उम्मीद है कि बाज़ार में सुधार होगा और 3 महीने में पोज़िशन वापस पहले जैसी हो जाएगी।
कुछ निवेशक अपने एसेट्स को बनाए रखना पसंद कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कीमतों में गिरावट अस्थायी है। हालाँकि, इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स के ज़रिए आप Nifty एसेट्स बेचकर बाज़ार में गिरावट के दौरान भी मुनाफ़ा बुक कर सकते हैं। स्थिति सुधरने पर आपकी पोज़िशन निश्चित रूप से बेहतर होगी।
इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग में जोखिम सीमित होते हैं। स्टॉक इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग करते समय अक्सर लिक्विडिटी की समस्या देखने को मिल सकती है। वहीं, संस्थागत निवेशक आम तौर पर इंडेक्स फ़्यूचर्स को ऐसे टूल के तौर पर चुनते हैं जिसमें लिक्विडिटी से जुड़े जोखिम कम से कम हों।
इससे बिड और आस्क प्राइस के बीच का अंतर कुछ कम हो जाता है, जिससे इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग एक सुरक्षित विकल्प बनती है। कम से कम, इससे आपके पास मौजूद एसेट्स में न्यूनतम लिक्विडिटी तलाशते हुए फँसे रहने के बजाय ट्रेडिंग के ज़्यादा अवसर मिलते हैं।
इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को स्टॉक फ़्यूचर्स की तुलना में कम कमीशन और STT दरें चुकानी पड़ती हैं। इसके अलावा, कुछ ब्रोकर ज़्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इंडेक्स ट्रेडिंग पर फ़िक्स्ड पैकेज देते हैं। दूसरे शब्दों में, आपको कम लागत वाला निवेश साधन मिलता है।
इक्विटी इंडेक्स फ़्यूचर्स, पारंपरिक स्टॉक ट्रेडिंग का बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इनमें संभावित रिटर्न अधिक, लागत कम और जोखिम प्रबंधन व समय-सीमा के लिहाज़ से निवेश में लचीलापन मिलता है। दूसरी ओर, इनमें लिक्विडिटी की कमी, लीवरेज, सेटलमेंट और डिलीवरी से जुड़े कुछ जोखिम हैं, साथ ही ऐसे अन्य जोखिम भी हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।