फ़ॉरेक्स ट्रेडर AUD/USD करेंसी पेयर की अच्छी लिक्विडिटी को पसंद करते हैं। ऑनलाइन ब्रोकर आकर्षक स्प्रेड ऑफ़र करते हैं। इसके अलावा, इस इंस्ट्रूमेंट के ज़रिए ग्लोबल आर्थिक रुझानों से जुड़ाव मिलता है।

AUD/USD में ट्रेड करने के लिए आपको इसकी अच्छी समझ होनी चाहिए, क्योंकि यह इंस्ट्रूमेंट कुछ खास वित्तीय डेटा पर तेज़ी से प्रतिक्रिया दे सकता है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक के मौद्रिक और राजकोषीय नीति से जुड़े हस्तक्षेपों का इस पर काफ़ी असर पड़ता है।
अपनी फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, इस लेख में बताए गए अहम फ़ंडामेंटल पहलुओं के साथ-साथ बुनियादी टेक्निकल एनालिसिस पर भी विचार करें।
AUD/USD, ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर के बीच के संबंध को दर्शाता है। आसान शब्दों में, यह बताता है कि 1 AUD खरीदने के लिए आपको कितने USD की ज़रूरत होगी। इस पेयर में ऑस्ट्रेलियन डॉलर बेस करेंसी है, जबकि USD काउंटर या कोट करेंसी है।
आम तौर पर, इस पेयर पर मार्केट के जोखिम संबंधी सेंटीमेंट और कमोडिटी की कीमतों का सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि यह फ़ॉरेक्स ट्रेडर्स के बीच इतना लोकप्रिय है। कुल मिलाकर, AUD/USD बाज़ार में सबसे ज़्यादा ट्रेड किए जाने वाले करेंसी पेयर्स में से एक है।
ऐसा माना जाता है कि AUD दुनिया की 5वीं सबसे ज़्यादा ट्रेड की जाने वाली करेंसी है। Bank for International Settlements की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल FX टर्नओवर में इसका हिस्सा 7% से ज़्यादा है।
वहीं, इस करेंसी पेयर को जोखिम से जुड़ा इंस्ट्रूमेंट माना जाता है। कमोडिटी की कीमतों में बदलाव शुरू होते ही ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर काफ़ी असर पड़ सकता है। इसकी मुख्य वजह देश का कच्चे माल का बड़ा निर्यात है।



AUD/USD में ट्रेड करने के मुख्य फ़ायदों और वजहों में ये शामिल हैं।
दुनिया में सबसे ज़्यादा ट्रेड की जाने वाली करेंसीज़ में शामिल होने के कारण, AUD/USD में अच्छी लिक्विडिटी होती है। ट्रेडर्स के लिए ज़्यादा लिक्विडिटी का मतलब है कम ट्रेडिंग लागत, कम स्लिपेज, बाज़ार में ज़्यादा गहराई और बड़ी मात्रा में खरीदने या बेचने पर भी कीमत में बड़े बदलाव के बिना ट्रेड करने की सुविधा।
एक बार फिर, सबसे ज़्यादा ट्रेड किए जाने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में से एक होने के कारण इस करेंसी पेयर में स्प्रेड कम रहते हैं, जो रिटेल ट्रेडर्स के लिए एक अच्छा फ़ायदा है। टाइट स्प्रेड का मतलब है कम ट्रेडिंग लागत।
AUD/USD में सोमवार से शुक्रवार तक 24/7 ट्रेड किया जा सकता है। इसका मतलब है कि जगह या टाइम ज़ोन की परवाह किए बिना, मार्केट में हिस्सा लेने वालों को बिना रुकावट और परेशानी के ट्रेडिंग का अनुभव मिलता है। हालांकि, सबसे ज़्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले समय में ट्रेड करना बेहतर रहता है।
जैसा कि पहले बताया गया है, AUD/USD कमोडिटी और जोखिम से जुड़ा करेंसी पेयर है। आसान शब्दों में, मार्केट सेंटीमेंट के बदलते रुझानों का इस इंस्ट्रूमेंट पर काफ़ी असर पड़ सकता है मार्केट सेंटीमेंट। अगर बाज़ार की स्थितियां काफ़ी अनुकूल हों, तो यह पेयर ऊपर जा सकता है। जब बाज़ार में मुश्किलें और उतार-चढ़ाव हों, तो AUD/USD नीचे जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के मुख्य निर्यात उत्पादों में सोना, कोयला, तांबा और लौह अयस्क शामिल हैं। इन कमोडिटी की कीमतें भी करेंसी पेयर पर काफ़ी असर डाल सकती हैं। AUD/USD फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में सफलता पाने के लिए इन सभी सहसंबंधों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। इसके अलावा, फ़ंडामेंटल मेट्रिक्स को पढ़ना जानना भी बहुत अहम है।
दूसरे कारक भी आपको सही फ़ैसले लेने और रुझानों का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं। इनमें Reserve Bank of Australia (RBA) की नीति और देश की कुल आर्थिक स्थिति शामिल हैं। इसके अलावा, चीन के प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों के बीच घनिष्ठ आर्थिक संबंध हैं।
इसे आसान तरीके से समझें: जब जारी किए गए आर्थिक डेटा में लगातार वृद्धि और मज़बूत बाहरी मांग दिखती है, तो AUD मज़बूत हो सकता है। इसके उलट, आर्थिक मंदी से विकास धीमा होगा और राष्ट्रीय करेंसी कमज़ोर होगी।
मौद्रिक और राजकोषीय नीति के आधार पर RBA भी AUD/USD करेंसी पेयर के रुझानों को प्रभावित करता है। बैंक हर महीने गाइडेंस जारी करता है, जिसमें ट्रेड की योजना बनाते समय ध्यान देने के लिए सभी प्रमुख आर्थिक डेटा शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर बैंक ब्याज दरों में कटौती करने की योजना बनाता है, तो AUD/USD गिर सकता है, जबकि दरें बढ़ाने से यह करेंसी पेयर ऊपर जा सकता है।
जैसा कि पहले बताया गया है, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच घनिष्ठ आर्थिक संबंध हैं। इसका मतलब है कि चीन से जुड़ी आर्थिक खबरों और डेटा के जवाब में AUD/USD में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
यह सब जोखिम लेने की आपकी तैयारी पर निर्भर करता है। इसके अलावा, हमें टाइमफ़्रेम, फ़ॉरेक्स रणनीति की पसंद और आपकी ट्रेडिंग शैली से जुड़े अन्य कारकों को भी ध्यान में रखना होगा।
हालाँकि, टेक्निकल एनालिसिस का इस्तेमाल करके AUD/USD में ट्रेडिंग करने का सामान्य तरीका काफ़ी जाना-पहचाना है। इसमें ये चरण शामिल हैं:
AUD/USD ट्रेडिंग के लिए निश्चित रूप से एक अच्छा एसेट है। यह सबसे ज़्यादा ट्रेड किए जाने वाले करेंसी पेयर्स में से एक है और इस मार्केट में 24/7 ट्रेडिंग की सुविधा है। ट्रेडिंग के सबसे सक्रिय घंटे शाम 7 बजे से सुबह 4 बजे के बीच होते हैं। RBA के किसी खास मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा या नीति के मामले में वोलैटिलिटी में तेज़ उछाल आ सकता है।
मार्केट के मुख्य प्रतिभागियों में केवल रिटेल ट्रेडर्स ही नहीं, बल्कि बैंक और वित्तीय संस्थान, हेज फ़ंड, करेंसी एक्सचेंजर और कमोडिटी की खरीद-बिक्री करने वाली कंपनियाँ भी शामिल हैं।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।