वित्तीय बाज़ार के प्रतिभागी 1980 से ही यह जानने में दिलचस्पी लेने लगे थे कि फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीतियों का बैकटेस्ट कैसे किया जाए। उसी समय बैकटेस्टिंग के शुरुआती तरीके सामने आए। वे सरल थे, लेकिन उनमें काफ़ी समय लगता था। इनके लिए वित्तीय बाज़ार के व्यवहार की गहरी जानकारी और समझ ज़रूरी थी।

आज ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की वजह से यह प्रक्रिया आसान हो गई है। ट्रेडर्स को अब असली बाज़ार की स्थितियों में अपनी तकनीकों को परखने के लिए महीनों इंतज़ार नहीं करना पड़ता। इसके अलावा, उन्नत सॉफ़्टवेयर से ऑटोमेटेड टेस्टिंग की जा सकती है और ट्रेडर के फ़ंड खोने का जोखिम नहीं रहता।
दूसरी ओर, मुख्य रूप से कंप्यूटर की क्षमता और उन्नत तकनीकों पर निर्भर रहना एक बड़ी गलती होगी। सफलता की कुंजी है आधुनिक सॉफ़्टवेयर को मानवीय सोच और ट्रेडिंग के अपने अनुभव के साथ जोड़ना। इस गाइड में, हम फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति को बैकटेस्ट करने के मुख्य चरणों की जानकारी देंगे
फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीतियों की बैकटेस्टिंग का मतलब आम तौर पर ऐतिहासिक डेटा का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाना है कि दी गई रणनीति समान बाज़ार स्थितियों में कैसा प्रदर्शन करेगी। दूसरे शब्दों में, इसमें बुनियादी नियमों, टेक्निकल पहलुओं, ऐतिहासिक कीमतों के डेटा और एनालिसिस का इस्तेमाल करके यह देखना शामिल है कि एक तय समयावधि में किसी खास रणनीति से क्या नतीजे मिल सकते हैं।
यह जानकारी ट्रेडर्स के लिए अतिरिक्त फ़ायदे लेकर आती है। इसके मुख्य फ़ायदे इस प्रकार हैं:
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, शुरुआती ट्रेडर्स को अपनी रणनीतियों को यथासंभव सफल बनाने का अच्छा मौका मिलेगा।



जैसा कि आप जानते हैं, इस प्रक्रिया में पिछली कीमतों के डेटा का इस्तेमाल करके मौजूदा बाज़ार स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ट्रेड को फिर से तैयार किया जाता है। यूज़र कई तरह के बैकटेस्टिंग सॉफ़्टवेयर में से चुन सकते हैं। इनमें अलग-अलग प्रकार और तरीके हो सकते हैं। सॉफ़्टवेयर के प्रकार के आधार पर, ट्रेडर्स कई टेक्निकल इंडिकेटर इस्तेमाल कर सकते हैं:
बेहतरीन बैकटेस्टिंग से आपको बाज़ार और रणनीति से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियाँ मिलेंगी, जिनकी मदद से आप संभावित प्रदर्शन का आकलन कर सकेंगे।
ट्रेडर्स के पास फ़ॉरेक्स रणनीति का बैकटेस्ट करने के लिए कई तरह के सॉफ़्टवेयर उपलब्ध हैं। हर सॉफ़्टवेयर की अपनी मूल्यांकन पद्धति और एल्गोरिदम होते हैं। हालांकि, बैकटेस्टिंग के दो मुख्य तरीके हैं: डेमो अकाउंट और मैन्युअल बैकटेस्टिंग।
आपकी पसंद की ट्रेडिंग शैली कितनी भी जटिल हो, किसी भी रणनीति को परखने का यह सबसे आसान तरीका है। इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आपको अपनी रकम जोखिम में नहीं डालनी पड़ती। ब्रोकर आपके अकाउंट में वर्चुअल फ़ंड डालता है, ताकि आप रियल मार्केट की परिस्थितियों में MT4, टेक्निकल इंडिकेटर्स और अन्य संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करके ट्रेड कर सकें।
इस तरीके में ज़्यादा समय लगता है। इसके अलावा, इसमें अधिक भागीदारी और वित्तीय जानकारी की ज़रूरत होती है। प्रक्रिया अपने आप में काफ़ी सरल है। आपको ऐतिहासिक प्राइस डेटा तैयार करके उसे किसी खास चार्ट पैटर्न के अनुसार ढालना होता है। फिर, तय समय-सीमा में प्राइस मूवमेंट को समझने के लिए हर बार की जाँच करनी होती है। इसके मुख्य फ़ायदे इस प्रकार हैं:
यह ज़रूरी टेक्निकल एनालिसिस कौशल सीखने का अच्छा तरीका है। आप खुद देख पाएँगे कि सॉफ़्टवेयर और इंडिकेटर्स कैसे काम करते हैं। इससे आपके वित्तीय और ट्रेडिंग कौशल बेहतर होंगे और आप नए ट्रेडर से एक अनुभवी फ़ॉरेक्स ट्रेडर बन सकेंगे।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।