दिन में ट्रेडिंग करने का सबसे अच्छा समय कैसे चुनें? सेशन के अनुसार ट्रेड करें। यह कोई रहस्य नहीं है कि ट्रेडिंग के नतीजे इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्रेड किस सेशन में किया गया है। इसी तरह, रणनीति का चुनाव भी फ़ॉरेक्स मार्केट के अलग-अलग ट्रेडिंग घंटों की विशेषताओं पर निर्भर करता है।
क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कितने ट्रेडिंग सेशन हैं और आपकी ट्रेडिंग के लिए कौन-से सबसे अच्छे हैं? आइए, फ़ॉरेक्स के लोकप्रिय ट्रेडिंग घंटों के बारे में वह सब जानें जो आपको जानना चाहिए।
फ़ॉरेक्स मार्केट कितने घंटे खुला रहता है? फ़ॉरेक्स की सबसे खास बात यह है कि मार्केट हफ़्ते में 5 दिन, 24 घंटे खुला रहता है। इससे ट्रेडर्स को दुनिया में कहीं से भी पूरे हफ़्ते ट्रेडिंग करके मुनाफ़ा कमाने के कई मौके मिलते हैं (रविवार 22:00 GMT से शुक्रवार 22:00 GMT तक)।

प्रमुख ट्रेडिंग सेशन कौन-से हैं?
*कृपया ध्यान दें कि सेशन शुरू होने का आधिकारिक समय तय नहीं होता और समय में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है।
हर सेशन का शुरू और बंद होने का समय होता है। आम तौर पर, हर सेशन का समय उस जगह और टाइम ज़ोन के अनुसार अलग-अलग होता है। कभी-कभी, मौसम के अनुसार भी इसमें बदलाव होता है, क्योंकि डेलाइट सेविंग टाइम (DST) लागू होता है।
उदाहरण के लिए, न्यूयॉर्क सेशन उन घंटों को कहते हैं जब NY में सरकारी और व्यावसायिक संगठन सर्दियों और गर्मियों के DST के अनुसार अपना काम शुरू करते हैं।
अच्छी बात यह है कि आपको इन सभी बातों को याद रखने की ज़रूरत नहीं है। ऑनलाइन फ़ॉरेक्स मार्केट के कई टाइम कन्वर्टर उपलब्ध हैं, जैसे www.worldtimebuddy.com, जो आपकी रुचि के टाइम ज़ोन के बारे में ताज़ा और सटीक जानकारी दे सकते हैं। आप चार्ट में कुछ टाइम ज़ोन जोड़कर उन सभी का समय एक साथ देख सकते हैं, जो बहुत सुविधाजनक है।



एशियाई सेशन को अक्सर टोक्यो सेशन भी कहा जाता है। यह सिडनी सेशन के शुरू होने (22:00 GMT) पर शुरू होता है और टोक्यो सेशन के बंद होने (08:00 GMT) पर खत्म होता है।

जापान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग केंद्र है। इसे टोक्यो सेशन कहने के बावजूद, इस दौरान ट्रेडिंग में सिर्फ़ जापान शामिल नहीं होता। हांगकांग, सिंगापुर और सिडनी भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
एशियाई (टोक्यो) ट्रेडिंग सेशन में लिक्विडिटी और वोलैटिलिटी अन्य प्रमुख सेशन जितनी नहीं होती। फिर भी, यह काफ़ी लोकप्रिय है, क्योंकि जापान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग केंद्र है। येन तीसरी सबसे ज़्यादा ट्रेड की जाने वाली करेंसी है और इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम फ़ॉरेक्स के सभी लेन-देन का लगभग 17% है।
यहाँ आप प्रमुख करेंसी पेयर्स के औसत एशियाई पिप रेंज देख सकते हैं। पिप रेंज का आपकी ट्रेडिंग के लिए क्या मतलब है? पिप में उतार-चढ़ाव जितना बड़ा होगा, वोलैटिलिटी उतनी ही ज़्यादा होगी और ट्रेड से मुनाफ़ा या नुकसान होने की संभावना वाले अवसर भी उतने ही ज़्यादा होंगे। एशियाई सेशन का अधिकतम फ़ायदा उठाने के लिए बेहतरीन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करें!
ये पिप वैल्यू पिछले डेटा की मध्य सीमा पर आधारित हैं और लिक्विडिटी तथा बाज़ार की अन्य स्थितियों के अनुसार बदलती हैं।

यह दो चरणों वाली रणनीति काफ़ी भरोसेमंद है और इसे लागू करना आसान है। खास बाज़ार स्थितियों के कारण, यह डे ट्रेडिंग के लिए उपयुक्त है। आइए जानें कि अमेरिका के सोते समय ट्रेडिंग से पैसे कैसे कमाए जा सकते हैं।

वोलैटिलिटी से मुनाफ़े और नुकसान, दोनों के बड़े अवसर मिलते हैं। दुर्भाग्य से, एशियाई सेशन के दौरान वोलैटिलिटी बहुत ज़्यादा नहीं होती, लेकिन इस सेशन के अपने फ़ायदे हैं।
सबसे ज़्यादा ट्रेड किया जाने वाला पेयर AUD/JPY है। हालांकि, टोक्यो सेशन में AUD/NZD और NZD/JPY पेयर्स की भी ट्रेडिंग होती है। बाज़ार में वोलैटिलिटी 00:00 GMT से पहले सबसे कम होती है, क्योंकि अमेरिकी ट्रेडर 12:00 GMT से 21:00 GMT के बीच सक्रिय रहते हैं। इसके बाद बाज़ार में आने वाले ऑस्ट्रेलियाई ट्रेडर आम तौर पर कीमतों में ज़्यादा हलचल नहीं लाते।
जिन देशों की करेंसी में आप ट्रेड करने वाले हैं, उनकी आर्थिक खबरें जारी होने के समय पर हमेशा ध्यान दें। खासकर तब, जब खबर जारी होने का समय किसी सेशन की शुरुआत के साथ हो।
इस रणनीति के लिए, M5 चार्ट टाइमफ़्रेम पर 22:00 GMT और 00:00 GMT के बीच कंसोलिडेशन का इंतज़ार करें। कंसोलिडेशन क्या है? कंसोलिडेशन वह अवधि है जब बाज़ार में ठहराव होता है और कीमत की अगली चाल को लेकर अनिश्चितता रहती है। ट्रेडर बड़े पोज़िशन लेने से पहले कंसोलिडेशन की अवधियों का इस्तेमाल एसेट जमा करने और बेचने के लिए करते हैं।
महत्वपूर्ण नोट: अगर कंसोलिडेशन के दौरान कीमत का ट्रेंड बना हुआ है, तो इस रणनीति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके लिए ज़रूरी रिवर्सल शायद न हो।
ब्रेकआउट क्या होता है? जब वॉल्यूम बढ़ने के साथ कीमत तय सपोर्ट या रेज़िस्टेंस लेवल से बाहर निकलती है, तो इसे ब्रेकआउट कहते हैं। ट्रेंड की दिशा में होने वाले ब्रेकआउट को चुनना बेहतर होता है, क्योंकि वे आम तौर पर ज़्यादा समय तक बने रहते हैं।

अगर 00:00 GMT तक ब्रेकआउट न दिखे, तो चिंता न करें। रेंज का ब्रेक एशियाई सेशन के दौरान होने की संभावना है। फेकआउट बहुत कम होते हैं, लेकिन उनकी संभावना बनी रहती है।
दो शब्द: दोबारा जाँचें। एशियाई सेशन में ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम होता है, इसलिए जब कैंडलस्टिक पहली बार रेंज को तोड़े, तब पोज़िशन खोलने की सलाह नहीं दी जाती।
दूसरे, पुष्टि करने वाले ब्रेक का इंतज़ार करें और कैंडलस्टिक के ओपनिंग प्राइस पर पोज़िशन खोलें।
AUD/JPY पेयर के लिए M5 टाइमफ़्रेम पर हमारे MetaTrader प्लेटफ़ॉर्म का उदाहरण देखकर जानें कि इस रणनीति को कैसे लागू किया जाता है।
नीचे दिए गए चार्ट में 00:20 MT* (21:20 GMT) से 02:30 MT तक कंसोलिडेशन का एक स्पष्ट उदाहरण दिखाया गया है। जैसा कि आप देख सकते हैं, 2:30 MT के बाद कीमत नीचे की ओर ब्रेक करती है।
*MT - माउंटेन टाइम (गर्मियों में GMT+3 और सर्दियों में GMT+2)
जब अगली कैंडलस्टिक पिछली कैंडलस्टिक से नीचे बंद होती है, तो 75.62 पर पिछले लो से नीचे शॉर्ट पोज़िशन खोली जाती है।
स्टॉप लॉस 75.66 पर (रेज़िस्टेंस से ऊपर) और टेक प्रॉफ़िट 75.47 पर (सपोर्ट लेवल से ऊपर) रखा जाता है।

ट्रेडिंग टिप: अगर आप मुनाफ़ा बहुत जल्दी बुक नहीं करना चाहते, तो उसे चरणों में बुक करें और रिवर्सल होने पर स्टॉप ऑर्डर को ट्रेल करें।
ध्यान दें कि दो-चरणों वाली यह रणनीति तभी काम करती है, जब टोक्यो सेशन शुरू होने से पहले रेंज बने। इस तरह का कंसोलिडेशन काफी आम है और इससे आपको गारंटीड मुनाफ़ा मिल सकता है।
हमारे अपडेट देखते रहें! हमारे एजुकेशन सेक्शन
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।