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शेयर खरीदते या बेचते समय लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल कैसे करें

लिमिट ऑर्डर उन ट्रेडर्स के लिए एक ज़रूरी टूल है, जो यह तय करना चाहते हैं कि वे कितना खर्च करेंगे, जब शेयरों में ट्रेडिंग करते हैं। यह buy limit order या sell limit order हो सकता है। यानी इस टूल का इस्तेमाल एसेट खरीदने या बेचने, दोनों के लिए किया जा सकता है। इस वजह से यह एक उपयोगी टूल है, क्योंकि इसे ट्रांज़ैक्शन के दोनों पक्षों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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एक ओर, लिमिट ऑर्डर से ट्रेडिंग की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इसके अलावा, बाज़ार में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव होने पर मुनाफ़े की संभावना वाले ट्रेड का मौका चूकने का जोखिम रहता है। दूसरी ओर, यह जोखिम प्रबंधन के उन बुनियादी विकल्पों में से एक है जिन पर ट्रेडर्स को विचार करना चाहिए।

इस लेख में, हम स्टॉप लिमिट ऑर्डर के इस्तेमाल के मुख्य फ़ायदों के साथ-साथ यह भी समझेंगे कि शेयर खरीदते या बेचते समय यह कैसे काम करता है।

लिमिट ऑर्डर क्या है?

शुरुआत में, लिमिट ऑर्डर का मकसद यही होता है कि वह कीमत तय की जाए जिस पर आप एसेट खरीदना या बेचना चाहते हैं। इस टूल का मुख्य फ़ायदा यह है कि इसे ट्रेड के दोनों पक्षों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह काफ़ी लचीला बन जाता है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसके ज़रिए संबंधित शेयर को खरीदने या बेचने के लिए कीमत की एक सीमा तय की जाती है। आसान शब्दों में, आप बाज़ार को अपनी तय की हुई कीमत और सबसे अनुकूल ट्रेडिंग शर्तें बताते हैं:

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  1. एक buy limit order से ट्रेडर्स को शेयर की कीमत में अचानक होने वाली उछाल से बचने में मदद मिलती है।
  2. sell limit order से ट्रेडर्स को शेयर की कीमत में अचानक गिरावट से बचने में मदद मिलती है।

ध्यान दें: लिमिट और मार्केट ऑर्डर एक जैसे नहीं होते। ये एक-दूसरे के विपरीत हैं।

मार्केट ऑर्डर का इस्तेमाल करने पर, कीमत की परवाह किए बिना ट्रेड को जल्द से जल्द निष्पादित किया जाता है। पारंपरिक ट्रेडिंग ऐप की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स इस्तेमाल करने वाले नए ट्रेडर्स के अक्सर पहले से तय मार्केट ऑर्डर लगाने की संभावना होती है।

हालाँकि, बाज़ार में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव होने पर ऐसे ऑर्डर का कोई फ़ायदा नहीं होता, क्योंकि ट्रेड को अनुमानित ऑर्डर की कीमत के जितना संभव हो उतना करीब निष्पादित किया जाता है। ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने और ट्रेंड में तेज़ी से उतार-चढ़ाव होने पर यह काम नहीं करेगा। खरीदते समय इससे आपकी उम्मीद से ज़्यादा नुकसान हो सकता है, या बेचते समय आपको कम रकम मिल सकती है।

ध्यान दें: लिमिट ऑर्डर को चालू या बंद करने के लिए अपने ब्रोकर की ट्रेडिंग प्राथमिकता सूची देखें।

ट्रेड करते समय लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल कैसे करें

लिमिट ऑर्डर लगाने के लिए, आपको कुछ बुनियादी चीज़ें तय करनी होंगी। आपका स्टॉकब्रोकर इनका इस्तेमाल करके ट्रेड निष्पादित करेगा। इनमें शामिल हैं:

  • ट्रांज़ैक्शन का प्रकार। क्या आप buy order लगाने वाले हैं या sell order?
  • आप किस तरह की सिक्योरिटी खरीदना या बेचना चाहते हैं।
  • शेयरों की संख्या।
  • ऑर्डर का प्रकार (buy या sell limit order, market order आदि)।
  • सिक्योरिटी की कीमत।

इन 5 बातों को ध्यान में रखकर, ब्रोकर आपकी पसंदीदा बाज़ार स्थितियों के अनुसार लिमिट ऑर्डर लगाएगा। बेशक, बाज़ार की स्थिति के हिसाब से इन बातों में बदलाव किया जा सकता है।

लिमिट ऑर्डर इस्तेमाल करने के फ़ायदे

लिमिट ऑर्डर लगाने के लिए कुछ जानकारी और अभ्यास की ज़रूरत होती है। अगर आप बाय लिमिट ऑर्डर का भाव बहुत कम रखते हैं, तो ऑर्डर के निष्पादित न होने की संभावना काफ़ी ज़्यादा होती है। सेल लिमिट ऑर्डर के साथ भी ऐसा ही हो सकता है। समय के साथ, आपको इतना अनुभव हो जाएगा कि आप लिमिट ऑर्डर लगाने के सही स्तरों की पहचान कर सकें और उसके निष्पादित होने की संभावना बढ़ा सकें।

निष्कर्ष

लिमिट ऑर्डर जोखिम प्रबंधन का एक बेहतरीन टूल लग सकते हैं। एक ओर, ये ट्रेडर्स को बड़े नुकसानों से बचा सकते हैं। दूसरी ओर, इनसे आपको उम्मीद से ज़्यादा फ़ायदा भी हो सकता है।

साथ ही, ऐसे ऑर्डर से नुकसान भी हो सकता है, ख़ासकर जब बाज़ार में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव के कारण वे बहुत जल्दी सक्रिय हो जाएँ। सबसे अनुकूल नतीजे के लिए, विशेषज्ञ लिमिट ऑर्डर को दैनिक मूल्य उतार-चढ़ाव की सीमा से बाहर लगाने की सलाह देते हैं।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।