ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश्य यूज़र्स को प्रक्रिया पर नज़र रखे बिना, ऑटोपायलट पर ट्रेड करने की सुविधा देना है। ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग बॉट खास एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है, जिनकी मदद से तय समय-सीमा के भीतर बिना किसी अतिरिक्त दखल के एसेट खरीदे और बेचे जा सकते हैं। पसंदीदा रणनीति के अनुसार ऑटो रणनीतियाँ सेट की जा सकती हैं। इसके लिए कॉइन की कीमत, पोर्टफ़ोलियो में उसका अनुपात, इस्तेमाल किए गए टेक्निकल इंडिकेटर और ऐसे ही अन्य पैरामीटर ध्यान में रखे जा सकते हैं।

ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग बॉट उन लोगों के लिए काफ़ी उपयोगी हो सकते हैं जिनके पास फ़ुल-टाइम ट्रेडिंग के लिए समय नहीं है। हालांकि, इन टूल्स में कुछ अतिरिक्त जोखिम और कमियाँ भी हैं, जिन पर इस्तेमाल करने से पहले ट्रेडर्स को विचार करना चाहिए।
ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल करने पर आपको ऑटोपायलट पर ट्रेड करने का टूल मिलता है। इसकी प्रक्रिया काफ़ी आसान है। आपको बस एक उपयुक्त ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म चुनना है, अकाउंट खोलना है, ज़रूरी पैरामीटर सेट करने हैं और तय अवधि के लिए एल्गोरिदम चलाना है। इसके बाद प्रोग्राम बिना किसी मैन्युअल दखल के सभी ज़रूरी काम पूरे कर देगा।
आमतौर पर, ट्रेडिंग बॉट प्लेटफ़ॉर्म के API के हिस्से के रूप में काम करते हैं। इसका मतलब है कि वे डिजिटल मध्यस्थों या ब्रोकरों के ज़रिए एक्सचेंज से जुड़े रहते हैं। उन्नत प्लेटफ़ॉर्म किसी खास प्लेटफ़ॉर्म या API के बजाय ब्लॉकचेन के भीतर काम करते हैं। लेन-देन को स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के रूप में बनाए रखा जाता है, जिनका कोड उपलब्ध होता है। इससे गुमनामी और प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
हालांकि, सभी कॉइन का ट्रेड स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए नहीं किया जा सकता।
ये ट्रेडर की ओर से मध्यस्थ के रूप में काम करते हैं और खास शर्तों (पैरामीटर) के आधार पर ऑटोपायलट पर ट्रेड करने देते हैं। ये शर्तें एक क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग रणनीति को दर्शाती हैं। बॉट को बाज़ार के उतार-चढ़ाव, कॉइन की कीमतों, अकाउंट सेटिंग्स और अन्य अहम डेटा को ध्यान में रखकर कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।
रिसर्च से पता चलता है कि बॉट की मदद से नाकामियों और गलतियों की संख्या कम हो सकती है। बाज़ार में कुल क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग वॉल्यूम में इनका हिस्सा लगभग 70% है। हालांकि, इससे सफलता की गारंटी नहीं मिलती। आपको अपने तरीके के अनुसार सही तरह का बॉट चुनना होगा।
कुछ बॉट का इस्तेमाल डेटा का विश्लेषण करने और जोखिम का अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है, जबकि दूसरे बॉट खरीदने और बेचने के ऑर्डर देने के लिए बनाए गए हैं। यह जानने के लिए कि कौन-सा ऑटोमेटेड क्रिप्टो ट्रेडिंग ऐप आपकी ज़रूरतों के मुताबिक़ है, आइए कुछ लोकप्रिय प्रकारों पर नज़र डालें:



ऑटोमेटेड सिस्टम क्रिप्टो ट्रेडर्स को कई फ़ायदे देते हैं, लेकिन यह समझना बहुत ज़रूरी है कि ये सिर्फ़ टूल्स हैं। ये ऐप हर किसी के लिए उपयुक्त समाधान नहीं हैं। एक ओर, इनमें किसी भी दूसरी ट्रेडिंग रणनीति की तरह जोखिम होते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह सोच लें। दूसरी ओर, ये सिर्फ़ एक सिस्टम हैं, जिनमें गड़बड़ियाँ, त्रुटियाँ और खराबी हो सकती है। इसके अलावा, ये पूरी तरह डिजिटल और ब्लॉकचेन परिवेश पर निर्भर करते हैं।
जहाँ बॉट सिर्फ़ एल्गोरिदम पर निर्भर करते हैं, वहीं कॉपी ट्रेडिंग ट्रेडर्स को ऑटोपायलट पर अनुभवी ट्रेडर्स के ट्रेड कॉपी करने की ज़्यादा सुविधा देती है। दूसरे शब्दों में, इसका उद्देश्य भी वही है—प्रक्रिया को ऑटोमेटेड और आसान बनाना। हालांकि, कॉपी ट्रेडिंग मशीनों पर निर्भर नहीं करती। इसमें उन अनुभवी ट्रेडर्स के ट्रेड कॉपी किए जाते हैं जिनकी आज़माई हुई रणनीतियाँ और ट्रैक किया जा सकने वाला प्रदर्शन होता है।
एक शुरुआती ट्रेडर के तौर पर, आप रजिस्टर करके पूरी तरह ऑटोमेटेड ट्रेडिंग टूल्स का अनुभव ले सकते हैं। आपको बस फ़ॉलो करने के लिए एक प्रो ट्रेडर चुनना है, ट्रेडिंग रणनीति सेट करनी है और अपने कंप्यूटर पर नज़र रखे बिना मास्टर ट्रेडर के ट्रेड कॉपी करके प्रॉफ़िट शेयर करना है।
शुरुआती लोगों के लिए मुख्य फ़ायदे:
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।