
सोमवार की शुरुआत में भू-राजनीतिक चिंताओं का बाज़ार पर दबदबा है। सप्ताहांत में हमास के नेतृत्व में हुए घातक हमले और अपहरणों के जवाब में इज़राइल कार्रवाई कर रहा है। युद्ध के कारण पिछले तीन दिनों में एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इससे बाज़ार का रुझान सुरक्षित निवेशों की ओर बढ़ा है, जबकि अमेरिका और जापान के बाज़ार आंशिक रूप से बंद हैं।
इससे अमेरिकी डॉलर ने चार दिनों में पहली बार दैनिक बढ़त दर्ज की और पिछले हफ़्ते का नुकसान कुछ कम किया, जो 12 हफ़्तों में उसका पहला साप्ताहिक नुकसान था। इससे कमोडिटीज़ और ऑस्ट्रेलियाई व न्यूज़ीलैंड डॉलर जैसी जोखिमभरी एसेट्स पर गिरावट का दबाव पड़ा। रिपोर्ट लिखे जाने तक EURUSD और AUDUSD में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि USDJPY, GBPUSD और NZDUSD में ताज़ा कारोबार में मामूली नुकसान दर्ज हुआ। अमेरिकी स्टॉक फ़्यूचर्स और एशिया-प्रशांत के शेयर भी जोखिम से बचने के इस रुझान को दर्शाते हैं।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि सोने और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई। XAUUSD के पारंपरिक सेफ़-हेवन आकर्षण के चलते, जबकि तेल की कीमतों ने आपूर्ति में कमी की आशंकाओं को सही साबित किया।
वहीं, व्यापक जोखिम-विमुखता और मज़बूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच BTCUSD और ETHUSD पर दबाव बना हुआ है।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



फ़िलिस्तीन स्थित हमास के सैन्य समूह ने दो दिन पहले गाज़ा पट्टी में जानलेवा युद्ध की शुरुआत की। उसने लगभग 700 इसराइलियों की हत्या की और कई दर्जन लोगों को बंधक बना लिया। इसके बाद उसने लगभग 150 मिसाइलों से इसराइली हवाई अड्डे को उड़ाने की चेतावनी दी। जवाब में, इसराइली सेना ने गाज़ा के पास ज़ोरदार हवाई हमले किए और हमास के 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। रॉयटर्स ने कहा, “फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बच्चों समेत 400 से अधिक लोग मारे गए हैं।” इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने ऐसी ख़बर साझा की जिसमें कहा गया कि हमास के नेतृत्व में हुए हमले की साज़िश रचने में इसराइल के कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान का समर्थन था। अगर इसकी पुष्टि होती है, तो इससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ेगा और बाज़ार में जोखिम से बचने की भावना को बल मिल सकता है। इससे अमेरिकी डॉलर के और मज़बूत बने रहने की संभावना है।
जोखिम से बचने की भावना के अलावा, अमेरिकी रोज़गार रिपोर्ट पर दोबारा विचार करने से भी अमेरिकी डॉलर मज़बूत बना रहा। सितंबर की रोज़गार रिपोर्ट देखने में कम प्रभावशाली थी, लेकिन इसमें सकारात्मक आँकड़े आए। हालांकि, मुख्य गैर-कृषि पेरोल (NFP) में मज़बूत नियुक्तियां दिखीं, जबकि बेरोज़गारी दर और औसत प्रति घंटा कमाई के आँकड़े अपेक्षाकृत कमज़ोर रहे। विवरण के अनुसार, NFP का आंकड़ा 336K रहा, जबकि अनुमान 171K का था और पिछला आंकड़ा 227K था (जिसे 187K से संशोधित किया गया)। वहीं, 3.7% की उम्मीद के बावजूद बेरोज़गारी दर 3.8% पर अपरिवर्तित रही। इसके अलावा, औसत प्रति घंटा कमाई (जिसे आम तौर पर वेतन वृद्धि कहा जाता है) में भी थोड़ी नरमी आई। इससे Fed के सख़्त रुख वाले सदस्यों की उम्मीदों पर पानी फिरा, जिसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा।
ध्यान देने वाली बात है कि नवंबर में वॉशिंगटन और बीजिंग के नेताओं की संभावित मुलाकात के बावजूद अमेरिका-चीन तनाव बना हुआ है। अमेरिका के बाहर की गंभीर आर्थिक चिंताएँ भी माहौल को प्रभावित कर रही हैं, डॉलर को समर्थन दे रही हैं और क्रूड ऑयल पर दबाव डाल रही हैं। हालांकि, सऊदी अरब की यह तैयारी कि ज़रूरत पड़ने पर वह काले सोने के खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए तेल उत्पादन बढ़ाएगा, हाल में ऊर्जा खरीदारों की परीक्षा लेती दिखी।
दूसरी ओर, अमेरिकी उपभोक्ता मामलों का निगरानीकर्ता और नियामक क्रिप्टो पर नए प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। साथ ही, BTCUSD और ETHUSD के इस्तेमाल को लेकर ई-बैंकिंग कानून लागू करने की कोशिश भी कर रहा है। इससे क्रिप्टोकरेंसी पर दबाव बढ़ रहा है और अमेरिकी SEC की ओर से पैदा हुई मुश्किलें भी इसमें शामिल हैं।
जापान में लंबे वीकेंड के कारण सप्ताह की सुस्त शुरुआत के बाद, वैश्विक बाज़ारों में और सुस्ती रहने की संभावना है, क्योंकि US बॉन्ड बाज़ार बंद हैं और आर्थिक कैलेंडर में भी कोई बड़ा डेटा/इवेंट नहीं है। फिर भी, NYSE में जोखिम से बचने का रुख दिख सकता है, जिससे US Dollar, Yen और Gold जैसी सुरक्षित संपत्तियों को तरजीह मिलेगी और मोमेंटम ट्रेडर्स को ट्रेडिंग के मौके मिल सकते हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!