
पिछले दिन भारी उतार-चढ़ाव देखने के बाद बुधवार की शुरुआत में ट्रेडरों ने राहत की सांस ली। Fed के आक्रामक रुख वाले अधिकारी ऐसे और संकेत तलाश रहे हैं जो अमेरिकी केंद्रीय बैंक की दर कटौती में देरी के हालिया अनुमान का समर्थन कर सकें। लंबे वीकेंड के बाद हांगकांग के बाजारों की वापसी और भू-राजनीतिक मोर्चे से कोई बड़ी नकारात्मक खबर न आने से बाजार प्रतिभागियों ने मंगलवार के तेज़ उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक कम किया।
हालांकि, अमेरिका में महंगाई ऊंची रहने से फ़ेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों में कटौती टालने की बाज़ार की उम्मीदों को बल मिला। वहीं, अमेरिकी शेयरों में गिरावट से US ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर को और मज़बूती मिली।
अमेरिकी डॉलर की मज़बूती के चलते कमोडिटी और ऑस्ट्रेलियाई तथा न्यूज़ीलैंड डॉलर जैसी जोखिम वाली एसेट कई दिनों के निचले स्तर पर आ गईं। प्रमुख करेंसी भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफ़ी गिरावट के साथ बंद हुईं। हालांकि, कच्चा तेल इसका अपवाद रहा और मज़बूत बुनियादी कारकों के चलते एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
BTCUSD और ETHUSD जैसी लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी भी इससे अछूती नहीं रहीं। कई दिनों के उच्च स्तर पर हालिया तेज़ी थमने के बाद, बुधवार की शुरुआत में इनमें खरीदारी लौटी। इसकी मुख्य वजह स्पॉट ETF को मंज़ूरी मिलने की उम्मीद थी।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



पिछले दिन अमेरिका के महंगाई के आँकड़े उम्मीद से अधिक मज़बूत आए। इससे बाज़ार में यह आम राय और मज़बूत हुई कि अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व (Fed) बहुप्रतीक्षित दर कटौतियों को टाल देगा, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और यील्ड को समर्थन मिला।
ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिकी कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महीने-दर-महीने (MoM) बाज़ार के अनुमान और पिछले आंकड़े, दोनों से ऊपर रहा। वहीं, फ़ूड और एनर्जी को छोड़कर CPI—जिसे कोर CPI भी कहा जाता है—ने “लंबे समय तक ऊंची” ब्याज दरों की ज़रूरत को रेखांकित करने में अधिक उपयोगी संकेत दिया।
जनवरी में अमेरिका की महंगाई और कोर महंगाई के आंकड़े मजबूत रहने के बाद, मई में Fed की ब्याज दरों में कटौती की संभावना एक दिन पहले के 70% से घटकर 40% रह गई। वहीं, मार्च में Fed की दरों में कटौती की संभावना सिर्फ 10% है, जबकि जून में ऐसी कटौती की संभावना लगभग 50% मानी जा रही है। गौरतलब है कि हेज फंड कंपनी DoubleLine Capital के प्रमुख संस्थापक Jeffrey Gundlach ने 2024 में Fed की दरों में कटौती की संभावना को खारिज कर दिया। इससे अमेरिकी डॉलर के बुल्स को बढ़त बनाए रखने का मौका मिला।
फेड की सख्त मौद्रिक नीति को लेकर चिंताओं के साथ-साथ अमेरिकी शेयरों के कमजोर प्रदर्शन ने भी अमेरिकी डॉलर और ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड को बढ़ावा दिया। इससे प्रमुख मुद्राओं, कमोडिटी और ऑस्ट्रेलियाई व न्यूज़ीलैंड डॉलर पर दबाव पड़ा। वहीं, मंगलवार को अमेरिकी स्मॉल-कैप शेयरों में जून 2022 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
इससे सोने की कीमत में दिसंबर 2023 की शुरुआत के बाद की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज हुई। हालांकि, अमेरिका के महंगाई के उत्साहजनक आंकड़ों से अमेरिकी डॉलर में आई तेजी और निजी सर्वेक्षक अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के अनुसार कच्चे तेल के भंडार में हुई भारी बढ़ोतरी के बावजूद तेल की कीमतें बढ़कर महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इसकी वजह ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ (OPEC) की मासिक रिपोर्ट हो सकती है। तेल उत्पादक देशों के संगठन ने 2024 और 2025 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास के अनुमान में संशोधन किया, जबकि तेल की मांग को लेकर अपना अनुमान बरकरार रखा।
दूसरी ओर, जर्मन सरकार द्वारा आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती की चिंताओं, अमेरिकी डॉलर की व्यापक मज़बूती और ZEW आर्थिक भावना के मिले-जुले आंकड़ों ने EURUSD की कीमत पर दबाव डाला। यूरो पेयर की चाल यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के मुख्य अर्थशास्त्री Philip Lane की नरम टिप्पणियों के अनुरूप भी है। उन्होंने कहा कि अगला कदम ब्याज दरों में कटौती करना होगा, लेकिन इसका समय आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, ब्रिटेन में महंगाई के कमज़ोर आंकड़ों और पिछले दिन के मज़बूत अमेरिकी CPI आंकड़ों ने GBPUSD को साप्ताहिक निचले स्तर की ओर धकेल दिया, जबकि हाल में अमेरिकी डॉलर में गति की कमी रही है।
दूसरी ओर, जापानी अधिकारियों की मौखिक दखलअंदाज़ी और यील्ड में सुधारात्मक गिरावट के चलते USDJPY तीन महीनों के उच्चतम स्तर से नीचे आया। इस बीच, जापान के वित्त मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप वित्त मंत्री कांडा और वित्त मंत्री सुज़ुकी ने येन की चाल को सीमित करने के लिए बाज़ार में दखल देने की वकालत की। हालांकि, बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने संकेत दिया कि मौद्रिक नीति को सख़्त करने के लिए उन्हें ज़्यादा विरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा है, जिससे येन को उबरने में मदद मिली।
इसके अलावा, जनवरी में न्यूज़ीलैंड की खुदरा बिक्री में सुधार हुआ, जबकि भारत का थोक मूल्य सूचकांक (WPI) उस महीने नरम पड़ा।
आगे देखें तो आज यूरोज़ोन की Q4 GDP के शुरुआती आंकड़े और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (BoE) के गवर्नर एंड्रयू बेली का भाषण सुर्खियों में रहेंगे। हालांकि, यील्ड के प्रदर्शन और केंद्रीय बैंकरों के भाषणों पर खास नज़र रहेगी। बाजार की चाल हाल में स्थिर हुई है, फिर भी Fed को लेकर सख्त रुख की आशंकाएं अमेरिकी डॉलर को तेज़ी के पक्ष में ट्रेड करने वालों की नज़र में बनाए हुए हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!